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लोकसभा स्पीकर पर घिरा विवाद: हटाने के प्रस्ताव से गरमाया बजट सत्र, जानिए क्या है संवैधानिक प्रक्रिया
- Reporter 12
- 14 Feb, 2026
संसद के बजट सत्र 2026 का पहला चरण राजनीतिक टकराव और भारी हंगामे के बीच समाप्त हुआ, जहां राज्यसभा की कार्यवाही अपेक्षाकृत शांतिपूर्ण रही, वहीं लोकसभा में विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी खींचतान देखने को मिली। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने का अवसर नहीं दिया जा रहा, जिसके विरोध में सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ मोर्चा खोल दिया और उन्हें पद से हटाने की मांग करते हुए औपचारिक प्रस्ताव का नोटिस सौंप दिया। विपक्ष का आरोप है कि सदन संचालन के दौरान अध्यक्ष ने पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया और संवैधानिक पद की निष्पक्षता पर प्रश्न खड़े किए, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रहा है। संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया अनुच्छेद 94 के तहत निर्धारित है, जिसमें सदन में विशेष प्रस्ताव लाकर प्रभावी बहुमत से पारित करना आवश्यक होता है, साथ ही प्रस्ताव पेश करने से कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य है; प्रस्ताव पारित होने की स्थिति में स्पीकर तुरंत पद से हट जाता है लेकिन सांसद बना रहता है, जबकि प्रस्ताव खारिज होने पर वह पद पर बना रहता है। बताया जा रहा है कि 10 फरवरी को विपक्षी सांसदों द्वारा हस्ताक्षरित नोटिस लोकसभा सचिवालय को सौंपा गया और बजट सत्र के दूसरे चरण की शुरुआत 9 मार्च से होने पर उसी दिन इस पर चर्चा संभव है। उल्लेखनीय है कि स्वतंत्रता के बाद यह चौथा अवसर है जब किसी लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ हटाने का प्रस्ताव लाया गया है— इससे पहले 1954 में जीवी मावलंकर, बाद में हुकुम सिंह और 1987 में बलराम जाखड़ के खिलाफ ऐसे प्रस्ताव आए, लेकिन कोई भी पारित नहीं हो सका। वर्तमान राजनीतिक परिस्थितियों में यह मुद्दा केवल संसदीय प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहकर सत्ता-विपक्ष के व्यापक शक्ति संतुलन और संसदीय परंपराओं की निष्पक्षता पर भी महत्वपूर्ण बहस का कारण बन गया है, अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्ष पर्याप्त समर्थन जुटा पाएगा या यह प्रस्ताव भी इतिहास की तरह असफल साबित होगा।
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